From Wikipedia_hi - Reading time: 2 min| रत्नेश्वर महादेव मन्दिर | |
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मातृ मन्दिर, मातृ ऋण मन्दिर | |
रत्नेश्वर महादेव मन्दिर | |
| धर्म संबंधी जानकारी | |
| सम्बद्धता | सनातन हिन्दू धर्म |
| देवता | शिव |
| त्यौहार | महाशिवरात्रि |
| अवस्थिति जानकारी | |
| अवस्थिति | मणिकर्णिका घाट, वाराणसी |
| ज़िला | वाराणसी |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| देश | भारत |
| भौगोलिक निर्देशांक | 25°18′43″N 83°00′58″E / 25.3119°N 83.01603°Eनिर्देशांक: 25°18′43″N 83°00′58″E / 25.3119°N 83.01603°E |
| वास्तु विवरण | |
| निर्माण पूर्ण | आंकड़ों के अनुसार 19वीं शती, स्थानीय मान्यता अनुसार प्राचीन |
| अवस्थिति ऊँचाई | 25[1] मी॰ (82 फीट) |
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हिन्दू धर्म |
| इतिहास · देवता |
| सम्प्रदाय · पूजा · |
| आस्थादर्शन |
|---|
| पुनर्जन्म · मोक्ष |
| कर्म · माया |
| दर्शन · धर्म |
| वेदान्त ·योग |
| शाकाहार शाकम्भरी · आयुर्वेद |
| युग · संस्कार |
| भक्ति {{हिन्दू दर्शन}} |
| ग्रन्थशास्त्र |
| वेदसंहिता · वेदांग |
| ब्राह्मणग्रन्थ · आरण्यक |
| उपनिषद् · श्रीमद्भगवद्गीता |
| रामायण · महाभारत |
| सूत्र · पुराण |
| शिक्षापत्री · वचनामृत |
| सम्बन्धित |
| विश्व में हिन्दू धर्म |
| गुरु · मन्दिर देवस्थान |
| यज्ञ · मन्त्र |
| हिन्दू पौराणिक कथाएँ · हिन्दू पर्व |
| विग्रह |
| प्रवेशद्वार: हिन्दू धर्म |
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| हिन्दू मापन प्रणाली |
रत्नेश्वर महादेव मंदिर (जिसे मातृ-ऋण महादेव या वाराणसी का झुका हुआ मंदिर भी कहा जाता है) भारत के उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में गंगा तट पत सबसे अधिक फोटो लिये जाने वाले मंदिरों में से एक है। यह मंदिर, हालांकि अच्छी तरह से संरक्षित है, फ़िर भी उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर ओर झुकता हुआ है, और इसका गर्भगृह आमतौर पर गर्मियों के दौरान कुछ महीनों को छोड़कर, वर्ष के अधिकांश समय में पानी में डूबा हुआ होता है। रत्नेश्वर महादेव मंदिर मणिकर्णिका घाट, वाराणसी में स्थित है। मंदिर में कुल नौ अंश (डिग्री) तिरछा झुकाव है। [2] [3]
मंदिर का निर्माण शास्त्रीय शैली में नागर शिखर और फामसन मंडप के साथ किया गया है।[4] मंदिर का स्थान बहुत ही असामान्य है क्योंकि वाराणसी में गंगा के तट पर अन्य सभी मंदिरों के विपरीत, यह मंदिर बहुत निचले स्तर पर बनाया गया है, जिसके कारण जल स्तर मंदिर के शिखर के निचले भाग तक पहुंच जाता है। [5] मंदिर 9 अंश से अधिक झुका हुआ है।
यह बहुत कम जगह पर बनाया गया है; एवं इसके निर्माता को ज्ञात होना चाहिए था कि उसका गर्भगृह साल भर पानी के भीतर रहेगा। वर्ष के अधिकांश समय के दौरान अधिकांश मंदिर पानी के नीचे होने के बावजूद, यह अच्छी तरह से संरक्षित है, केवल झुकाव को छोड़कर जिसे 20 वीं शताब्दी के वित्रों में देखा जा सकता है।
निर्माण का वास्तविक समय अज्ञात है। हालांकि, पुजारियों का दावा है कि इसे लगभग 500 साल पहले राजा मान सिंह के एक अनाम नौकर ने अपनी मां रत्ना बाई के लिए बनवाया था। [6] राजस्व अभिलेखों के अनुसार इसका निर्माण 1825 से 1830 के बीच हुआ था। हालांकि जिला सांस्कृतिक समिति के डॉ. रत्नेश वर्मा के अनुसार इसका निर्माण अमेठी राजपरिवार ने करवाया था। [7] जेम्स प्रिंसेप, जो 1820 से 1830 तक बनारस टकसाल में एक परख शास्त्री थे, [8] ने चित्रों की एक श्रृंखला बनाई, जिनमें से एक में रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी शामिल है। उन्होंने टिप्पणी की कि जब मंदिर का प्रवेश द्वार पानी के नीचे था, पुजारी पूजा करने के लिए पानी में गोता लगाते थे।
कुछ स्रोतों का दावा है कि 19वीं शताब्दी में ग्वालियर की रानी बैजा बाई द्वारा बनवाया गया था। [9] एक अन्य कथा के अनुसार इसे इंदौर की रानी अहिल्या बाई की एक महिला दासी रत्ना बाई ने बनवाया था। अहिल्या बाई ने उसे झुक जाने का श्राप दिया क्योंकि उसकी दासी ने उसका नाम अपने नाम पर रखा था। [3]
1860 के दशक के चित्रों में इमारत को झुका हुआ नहीं दिखाया गया है। आधुनिक चित्र लगभग नौ डिग्री का झुकाव दिखाते हैं इमारत संभवतः झुकी हुई है क्योंकि इसे झुकाव के लिए ही बनाया गया ही प्रतीत होता है। [3] 2015 में बिजली गिरने से शिखर के कुछ तत्वों को साधारण क्षति हुई। [3]
मणिकर्णिका घाट में 1795 में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित [10] तारकेश्वर महादेव मंदिर जहां भगवान शिव तारक मंत्र (मुक्ति मंत्र) देते हैं, ऐसी ऐसी मान्यता है, उसी के सामने यह स्थित है ।[11] दोनों मंदिरों के बीच एक स्थान है जिसे 1832 में जेम्स प्रिंसेप द्वारा बनारस में सबसे पवित्र स्थान कहा गया था। [12] 1865 की एक तस्वीर में मंदिरों में से एक को विष्णुपद मंदिर कहा गया है। यह संभवतः गणेश मंदिर है जिसके पास भगवान विष्णु की चरण पादुका है (केवल विशिष्ट व्यक्तियों का ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है [13] )। कहा जाता है कि यही स्थान 1903 के प्रिंट में सती का स्थल था। [14]